OYO ROOMS, RITESH AGRAWAL

OYO ROOMS, RITESH AGRAWAL


उड़ीसा राज्य के रायगड़ जिले के एक छोटे से गाँव (वहाँ के 75% परिवार ग़रीबी रेखा के नीचे है) के मध्यमवर्गीय परिवार का एक लड़का गाँव की स्कूलमें जाता है,
वहाँ का शिक्षक सब छात्रों को बारी बारी पूछता है की

आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?

 तकरीबन हर छात्र इंजीनियर,डॉक्टर,पायलट और टीचर जैसे ही रटे रटाए जवाब देता है।

 लेकिन मैं जिसकी बात करने जा रहा हूँ उस छात्र का उसी प्रश्न का जवाब अनोखा होता है, वो जवाब देता है।

 'मैं बड़ा होकर आंत्रप्रिन्योर बनना चाहता हूँ '

 बहोत ही छोटी सी उम्रमें उसे अपनी आंत्रप्रिन्योर बनने की  तीव्र इच्छा के अतिरिक्त कॉम्प्यूटर में भी ज्यादा रुचि थी। उसके व्यापारी पिताजी के पास ऑफिसमें कॉम्प्यूटर था ही वह लड़का उस कॉम्प्यूटरमें लगा रहता था,
 वो बड़ा जिज्ञासु था उसके मनमें प्रश्न उमड़ते ही रहते थे।
 कॉम्प्यूटर की सीडीमें क्या होता होगा?
 फ्लॉपीमें क्या होता होगा?
             उसको हाईस्कूलमें कॉम्प्यूटर की बेझिक़ और पास्कल जैसी लैंग्वेज शिखाइ जाती थी लेकिन उस लड़के को इतने से संतोष नही था तो उसने GOOGLE में सर्च करके सॉफ्टवेयर कॉडिंग और प्रोग्रामिंग शिख लिया।

उसकी कॉम्प्यूटरमें रुचि को देखते हुए उसके पिताजीने उसे दसवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद IIT की पूर्वतैयारी के लिए राजस्थान के कोटा शहरमें भेज दिया। 2009 में उस लड़के ने कोटा स्थित बंसल ट्यूटोरियल क्लासिसमें एडमिशन लिया लेकिन थोड़े ही समयमें उसे पता चल गया की कॉम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के साथ यहाँ के एज्युकेशन का कुछ लेनादेना नही है,
लड़का बोर होने लगा अपने इस बोरडम को दूर करने के लिए उम्र सहज घूमने का शौक़ पूरा करने के लिए और अपनी इच्छा के मुताबिक नया नया शिखने की जिज्ञासा पूर्ण करने दिल्ही जाती हुई ट्रेनमें बैठ जाता और दिल्ही जाकर किसी सस्ती सी होटल या होस्टलमें ठहरता था जहाँ उसे एक सामान्य बेड और सुबह का नाश्ता मिल जाए।

दिल्ही जाकर करता था क्या?

 तो वो आंत्रप्रिन्योरऔर बिजनेसमैन के लिए प्रयोजित अलग अलग इवेंट्स, सेमिनार्स और कोफ़्रांसिस एटेंड करता था, कई इवेंट्स एटेंड करने के लिए पैसे भर के रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता, पैसे हो तो ठीक वरना लड़का कुछ ना कुछ जुगाड़ करके इवेंट एटेंड कर ही लेता था, लेक्चर सुनता था,प्रेजेंटेशन देखता था,लोगों से मिलता था और सब से कुछ ना कुछ शिखता रहता था।

 बारहवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद उस लड़के ने दिल्ही की एक कॉलेजमें एडमिशन ले लिया उसकी इच्छा ऐसी थी की पढ़ाई के साथ साथ किसी अमेरिकन यूनिवर्सिटीमें एडमिशन के लिए SAT की तैयारी करनी और साथमें अपने खुद के स्टार्टअप के लिए भी काम करना।

 इस बड़ी सोच और सपने के कारण वो कोलेजमें सिर्फ दो तीन दिन ही गया। एक दिन उस लड़के के पिताजी उड़ीसा से उसे सरप्राइज देने दिल्ही आ गएँ, तो उनको पता चला की उनका लड़का तो कॉलेज जाता ही नही।

अठारह साल के उस लड़केने अपने पिताजी को समझाया की मैं जो करना चाहता हूँ वो करने के लिए मुझे एक साल मुक्ति दो अगर उस एक सालमें मैं कुछ ना कर पाया तो कॉलेज जाना शुरू कर दूंगा और उसके पिताजी मान गए।

 परंपरागत पढ़ाई से मुक्ति के एक साल के दौरान वो लड़का कई लोगों से मिला। स्टार्टअप कैसे शुरू किया जाय? इसके बारेमें बहोत कुछ पढ़ा, ना ही सिर्फ पढ़ा अपने एक साथी से मिलकर OREVAL STAYS नामकी एक कंपनी भी शुरू की उनकी ये कंपनी Airbnb जैसी ही स्टार्टअप कंपनी थी।

 आपको अगर किसी जगह घूमने जाना हो तो ये कंपनी आपको कम पैसोमें प्राइवेट रूम या सर्विस एपार्टमेंट की सर्विस प्रोवाइड करवाती थी। उस लड़के की सही दिशा की मेहनत को देखते हुए उस लड़के को वेंचर नर्सरी नाम की इन्वेस्टमेंट फर्मने 30 लाख का फंड दिया, इससे लड़के का आत्मविश्वास और हिम्मत बढ़ गए।

                                                उसी दौरान भारतमें पहलीबार उस लड़के को ही PayPal के Peter Thiel
द्वारा संचालित (The Thiel Fellowship) थिएल फेलोशिप मिली जिसमें उसको अमेरिका जाकर आंत्रप्रिन्योर बनने की तालीम लेने का मौका मिला इतना ही नही सबसे महत्वपूर्ण बात अपने स्टार्टअप के लिए एक लाख डॉलर(आज के हिसाब से 70 लाख रुपये) भी मिले।

 उस The Thiel Fellowship ने उस लड़के की जिंदगी बदल दी

उस फेलोशिप के दौरान ही उसे पता चल गया की उसको अपनी पहली स्टार्टअप कंपनी OREVAL STAYS में आमूल चूल परिवर्तन करना होगा और उसका स्केल बड़ा करना होगा।

 इस आर्टिकल की शुरूआतमें मैं मैं बता चुका हूँ की उस लड़के को घूमने फिरने का शौक़ था तो वो दिल्ही के इतर उत्तर भारत के हिल स्टेशनों पर भी जाता रहता था वहाँ उसके ध्यानमें एक बात आई की सभी लोग तो फाइवस्टार होटेलमें नही रुक शकतें?

ज्यादातर लोग तो छोटी लेकिन पर्याप्त सुविधाओं वाली और अपने सीमित बजटमें फिट बैठे ऐसी ही होटल की तलाशमें रहते है।

लेकिन इस तरह की होटल की तलाशमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था अगर होटल बुक हो भी गई तो सर्विस का ठिकाना नही होता,रूम छोटे हो शकतें है,पानी का ठिकाना ना होना,बेडशीट गंदी होना,स्टाफ का बदतमीज होना,ब्रेकफास्ट का ठिकाना ना होना और सबसे बड़ी दिक्कत ये की ऐसी होटेलमें चेकइन करने के बाद पता चले की इससे अच्छे लोकेशन पर इससे अच्छी होटल इतने ही पैसोमें उपलब्ध थी। ये सारी बातें सारी यात्रा का मज़ा किरकिरा कर देती थी।

 और तकरीबन ऐसा ही अनुभव सब यात्रियों को होता ही है।

 तो हमारी इस सक्सेस स्टोरी के रियल हीरो के मनमें एक सवाल आया की क्या मैं इन सारी समस्याओ का समाधान टेक्नोलॉजी से कर शकता हूँ?

और उस लड़के ने उस दिशामें टेक्नोलॉजीकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करनेमें अपना सारा कमिटमेंट देना शुरू कर दिया। प्रवासीओ की उपर्युक्त और अन्य सारी समस्याओसे मुक्ति दिलाने और होटल मालिको को भी निरंतर कस्टमर मिलते रहे उस दिशामें अपना सारा जोश और जूनून लगा दिया।

 वो लड़का यात्रियों और होटल मालिको के लिए विन विन परिस्थिति तैयार करने के लिए अपनी ही कंपनी OREVAL STAYS का नाम बदल दिया और नया नाम रक्खा

OYO ROOMS

(OYO मतलब ऑन योर ऑन का शॉर्टफ़ोर्म मतलब आपका अपना रूम)
OYO ROOMS, RITEISH AGRAWAL
OYO ROOMS



               और उसने सबसे पहले गुड़गांव की ही दो चार होटल्स से अपने बड़े सपनेवाले और विजनरी काम की शुरुआत की वहाँ की होटल्स के स्टैंडर्ड सुधरने से होटल्स के कस्टमर्स की बढ़ोतरी हुई, रिपीट कस्टमर्स भी आने लगे इसका सीधा मतलब है सेटिस्फाइड कस्टमर्स बढ़े, होटल्स फुल रहने लगी इससे होटल्स मालिको का भी फायदा हुआ और वो भी उत्साहित हुए।

और आखिर उस युवा की सही दिशाकी और केंद्रित मेहनत रंग लाई और उसके चमत्कारिक परिणाम भी मिले।

आहिस्ता आहिस्ता OYO से टाइअप वाली होटल्स की संख्या बढ़ती गई आज देश और विदेश के तकरीबन 250 शहरोंमें OYO से टाइअप वाले लाखों होटल्स ROOMS है। OYO कंपनीने इतनी तेज गति से प्रगति की की कॉरपोरेट इतिहासकारों की आंखे फटी की फटी रह गई।

आज की तारीखमें OYO ROOMS

दुनिया की टॉप 10,

चीनकी टॉप 4 और

 भारत की पहले नंबर की होटल चेइन कंपनी है।

 OYO ROOMS का कद

 एक ओर TAJ , OBEROY जैसी फाइवस्टार ब्रांडेड होटल्स के ROOMS रख्खो और दूसरी ओर OYO के ROOMS रख्खो OYO ROOMSकी संख्या ज्यादा ही है। पूरे भारतके 180 शहरोंमें OYO ROOMSके कुल मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार ROOMS है।

 OYO ने आज चीन,मलेशिया,सऊदी अरेबिया,नेपाल और ब्रिटेन के होटल चेइन मार्केटमें धूम मचाई है। भारत से ज्यादा OYO ROOMSचीनमें है, चीनमें 1लाख 80 हज़ार OYO ROOMS है। और OYO ROOMS चीन की अपनी तरह की चौथे नंबर की कंपनी है। सिर्फ चीनमें ही OYO का 5500 लोगों का स्टाफ़ है।

आज OYO ROOMS का आर्थिक कद्द सिर्फ पाँच सालमें ही (यस सिर्फ 5 सालमें ही)5 बिलियन डॉलर(तकरीबन 35000 करोड़ रुपये) है।

 ये लड़का अभी अभी 25 साल का हुआ है (जन्म तारीख़ - 16 नवम्बर 1993 )

 और हाँ,
                                                                                 इसका नाम अब बता ही देता हूँ , उस लड़के का नाम है

RITESH AGRAWAL

OYO ROOMS, RITEISH AGRAWAL
RITESH AGRAWAL

 

रितेश का आत्मविश्वास,विज़न और कमिटमेंट एकदम फोकस्ड है इसलिए उसे सिर्फ 5 सालमें ही इतनी बड़ी सफलता मिली है।


 उसने खुद ने एक भी होटल नही बनवाई लेकिन छोटी बड़ी बनी बनाई होटल्स के साथ टाईअप करके उसे सिस्टमाइज और स्टाण्डर्डाइज किया है। OYO के साथ टाइआप होटेल्समें यात्री को सारी सुविधाएँ स्टैंर्डड मिलेंगी और होटल्स मालिको को पर्याप्त यात्री भी मिलते रहेंगे ये है WIN WIN सिचुएशन।

 OYO की टीम होटल्स के मैनेजर,रिशेप्शनिस्ट से लेकर सफाई कर्मचारीओ तक को ट्रैनिंग देता है

       सारे देशों के मिलाकर उसके 26 ट्रैनिंग इंस्टीट्यूट है।
          ये 25 साल का आत्रप्रिन्योर RITESH AGRAWALभारतमें 1 लाख और चीनमें 65000 हज़ार लोगों को रोज़गार दे चुका है।RITESH AGRAWAL का सपना OYO ROOMS को दुनिया की सबसे बड़ी होटल चेइन कंपनी बनाने का है।

 RITESH AGRAWAL अपनी कई स्पिचीजमें बता चूका है की थिएल फेलोशिप की ट्रैनिंग दौरान शिखा था की

 "DON'T LET UNIVERSITY COME IN THE WAY OF YOUR EDUCATION"

 यानी कॉलेज और यूनिवर्सिटी की सिर्फ किताबी इन्फॉर्मेशन को आपके असली ज्ञानमें बाधक मत बनने देना।

और RITESH AGRAWAL ऐसे ही जिया है बारहवीं कक्षा के बाद कभी भी कॉलेज गया ही नही यानी की RITESH AGRAWAL ने सिर्फ बारहवीं तक ही स्कूली शिक्षा ली है।
 इसके बाद RITESH AGRAWAL कभी भी पढ़ाई के लिए कॉलेज या यूनिवर्सिटी नही गया,

 हाँ, कॉलेज और यूनिवर्सिटीओमें छात्रों को प्रेरित करने के लिए कॉलेज या यूनिवर्सिटी के स्पेशल इन्विटेशन पर चीफ़ गेस्ट के तौर पर कई बार कॉलेज और यूनिवर्सिटीमें अवश्य गया है।

आपको मेरे द्वारा लिखी गई RITESH AGRAWAL की ये सक्सेस स्टोरी पसंद आइ हो तो कॉमेंट करके अवश्य बताएँ और हाँ इसे शेयर करना ना भूले 
OYO ROOMS, RITESH AGRAWAL OYO ROOMS, RITESH AGRAWAL Reviewed by BRAIN TO MIND on January 31, 2019 Rating: 5

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