BRAIN AUR MIND KE KARYPRAKAR KYA HAI?|BRAIN और MIND के कार्यप्रकार क्या है?

BRAIN और MIND से संबंधित मेरे पहले आर्टिकलमें मैंने आपको बताया था की इन दोनों में फर्क क्या है?
(इसकी लिंक ये रही, वहाँ  जाकर पढ़ शकते है)
यहाँ CLICK करें

अब इस आर्टिकलमें मैं आपको बताऊँगा की 

BRAIN और MIND के कार्यप्रकार क्या है?|BRAIN AUR MIND KE KARYPRAKAR KYA HAI?

BRAIN AUR MIND KE KARYPRAKAR KYA HAI?,BRAIN और MIND के कार्यप्रकार क्या है?

BRAIN और MIND के कार्यप्रकार क्या है?


तो आइए इसे हम इसे समझते है।
इसको समझाने के लिये यहाँ कॉम्प्यूटर की मेमोरी का उदाहरण देता हूँ, इससे इसे समझनेमें आसानी रहेगी।
कॉम्प्यूटरमें तीन प्रकार की मेमरी होती है।


1) RAM (RANDOM ACCESS MEMORY) (अस्थायी  मेमोरी)

2) HARD DISC (स्थायी लेकिन डिलिटेबल मेमोरी)

3) ROM (READ ONLY MEMORY)

अब बारी बारी तीनों का कार्य प्रकार और उपयोग समझतें है,साथ साथ हम कॉम्प्यूटर की इन तीनों प्रकार की मेमरी की तुलना हमारें BRAIN और MIND से भी करते चलेंगे इसे समझनेमें आसानी रहेंगी।

1) RAM (RANDOM ACCESS MEMORY) (अस्थायी  मेमोरी)

कॉम्प्यूटरमें RAM का कार्य प्रकार अस्थायी मेमोरी के तौर पर होता है।
RUNNING(चालू) काम के लिये ये आवश्यक है ये हमें तत्कालीन काम के लिए उपयोग में आती है।
लेकिन RAM की मर्यादा ये है की हम अपने चालू(RUNNING) काम को सेव(CTRL+S) किये बिना अगर कॉम्प्यूटर बंद कर देते है या बिना बैटरी के कॉम्प्यूटरमें काम चालू हो और इलेक्ट्रिसिटी अगर चली जाय तो RAM में से हमारे काम का सारा DATA डिलीट हो जाता है।
सीधी बात है ये अस्थायी मेमोरी है।
इसी तरह हमारे दिमाग(BRAIN)में भी कई मेमोरी एकदम अस्थायी होती है जो चालू वर्तमानमें तो काममें आती है लेकिन नजदीक या दूर के भविष्यमें उसकी तकरीबन कोई जरूरत नही होती।
उदाहरण के लिए
हमने कल क्या खाया था?
हमने परसों कौनसे कपड़ें पहने थे?
ऐसी मेमोरीकी हमें लंबे समय तक जरूरत नही होती इसलिए ये मेमोरी अस्थायी ही होती है और ज़्यादा से ज़्यादा ऐसी मेमोरी एक सप्ताह ही टिकती है,एक सप्ताहमें हम सब भूल जाते है।
जो हमारे BRAIN के स्वास्थ्य के जरूरी भी है।
BRAIN की इस मेमोरीकी  तुलना हम कॉम्प्यूटर की RAM से कर शकते है।

आइए अब मेमोरी के दूसरे प्रकार को समझते है।

2) HARD DISC (स्थायी लेकिन डिलिटेबल मेमोरी)

HARD DISC में स्थित मेमोरी कॉम्प्यूटर की स्थायी मेमोरी (PERMANENT MEMORY) होती है।
RAM में अस्थायी तौर रही हमारी मेमोरी को हम सेव कमांड(CTRL+S) देकर हम स्थायी तौर पर HARD DISK में STORE कर शकतें है।
और अपने काम को स्थायी रूप दें शकतें है।
सीधा मतलब है HARD DISC स्थायी मेमोरी है। लेकिन इसमें एक व्यवस्था तो है ही की समय के साथ हमारे लिए जो काम का प्रोजेक्ट नही रहता उसे हम डिलीट भी कर शकतें है।
हमारे दिमाग(BRAIN)में भी ऐसी ही डिलिटेबल(जिसको हम डिलीट कर शकतें है) स्थायी मेमोरी होती है।
जैसे की हमने पढ़ाई की शुरुआत की तो प्रथम कक्षामें मातृभाषा के पाठ्यक्रममें कौनसे पाठ और कौनसी कविताएं थी वो हमें आज याद नही है। लेकिन उस वक्त याद रखना जरूरी था तो याद भी रहता था।
लेकिन उसकी जरूरत जैसे जैसे कम होती जाती वैसे वैसे हमारे दिमाग(BRAIN)में से वो सारी यादें अपने आप डिलीट हो जाती है। 
और ये भी हमारें दिमागी स्वास्थ्य के लिए अच्छा ही है।
हमारे दिमाग(BRAIN) की इस मेमोरी की तुलना हम कॉम्प्यूटर की HARD DISCमें स्थित डिलिटेबल स्थायी मेमोरी से कर शकतें है।

और आइए अब मेमोरी के तीसरे प्रकार को समझते है।

3) ROM (READ ONLY MEMORY)

कॉम्प्यूटर की ये मेमोरी बहोत बहोत बहोत महत्वपूर्ण है।
इसके नाममें ही इसका अर्थ छिपा हुआ है। ये मशीन मेमोरी है।
इसे हम सिर्फ काममें ला शकतें है लेकिन हम उस मेमोरी में अपनी इच्छा के मुताबिक बदलाव नही कर शकतें।
क्यों की हम उस मेमोरी के सिर्फ यूज़र है, निर्माता(MANUFACTURER) नही।
ये मेमोरी कॉम्प्यूटरमें बहोत ही महत्वपूर्ण कार्य करती है। जैसे की हम कॉम्प्यूटरको स्वीच ऑन करते है तो सिर्फ थोड़ी ही सेकंडोंमें हमारे सामने स्टार्ट मेनू आ जाता है। इसके अतिरिक्त पूरे कॉम्प्यूटरके आंतरिक मैनेजमेंटका काम ROM ही करता है। और इसके बिना तो कार्य चल ही नही शकता।
हमारे MIND की तुलना हम ROM के साथ कर शकतें है। यहाँ ये याद रहे की ये MANUFACTURER द्वारा इंस्टॉल की हुई मेमोरी है (जैसे की Intel द्वारा CORE i5, CORE i7), यूज़र द्वारा इंस्टॉल की हुई नही।
जैसे ही कोई बच्चा जन्म लेता है तो वो अपने BRAIN में MIND के स्वरूपमें ROM जैसी ही मैन्युफैक्चरर द्वारा इंस्टॉल मेमोरी लेकर  इस दुनियामें आता है।
वो अपने आप हँसता है,भूख लगे तो रोता है ये सब पहले से ही प्रायोजित (PROGRAMMED) होता है उसे हमने नही शिखाया होता फिर भी अपने छोटे से शरीर की जरूरत का हर काम करता है या हमें संकेत देकर करवाता है।
क्यूँ की ये सारे प्रोग्राम MANUFACTURER द्वारा प्रि इंस्टॉल्ड होते है। 
और इसे ही हम मन(MIND) कहते है।
जो मेमोरी हमारें दिमाग (BRAIN) में तो है लेकिन इसमें हम अपनी इच्छा के मुताबिक बदलाव नही कर शकतें ऐसी मेमोरी को हम मन (MIND) कहते है।
और ये तीनों प्रकार की मेमोरी हमारे BRAIN में ही रहती है।
यहाँ इस आर्टिकलमें हमने हमारें दिमाग(BRAIN) में रहनेवाली तीनों प्रकार की मेमोरी को कॉम्प्यूटर की मेमोरी के साथ तुलना करके अच्छी तरह समझा।
विश्वास करता हूँ मेरा ये प्रयास आपको जीवनमें बहोत बहोत उपयोगी होगा।
और हाँ अगर मेरा ये प्रयास पसंद आया हो तो इसे शेयर करके आप मेरा उत्साह बढ़ा शकतें हो। और कॉमेंट करके सवाल भी पूछ शकतें हो।
अब मिलते है मेरे आनेवाले आर्टिकल में 
MIND के प्रोग्रामिंग को समझने के लिए।

THANKS....

BRAIN AUR MIND KE KARYPRAKAR KYA HAI?|BRAIN और MIND के कार्यप्रकार क्या है? BRAIN AUR MIND KE KARYPRAKAR KYA HAI?|BRAIN और MIND के कार्यप्रकार क्या है? Reviewed by BRAIN TO MIND on January 18, 2019 Rating: 5

1 comment:

Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज

Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज वर्ष 1852 में जर्मन अप्रवासी इंजीनियर  John Augustus Roebling  न...

Theme images by merrymoonmary. Powered by Blogger.